शनिवार, 16 अक्तूबर 2010

रावण पर इमोशनल अत्याचार

सुनील शर्मा

मैं नहीं जानता कि आज माननीय, पूजनीय, परमश्रद्धेय रावण जी महाराज की कौन सी पुण्यतिथि है लेकिन इतना जरूर पता है कि आज ही के दिन ओरिजनल रावण की मौत हुई थी. खैर छोडि़ए.

इस मौके पर एक बात कहना चाहता हूं जिसका इंतजार पिछले एक साल से कर रहा हूं, पिछले साल भूल गया था. पता है मैं शुरू से ही बहुत परेशान हूं. किससे और किससे उसी से जिससे आप सभी परेशान है. अरे वहीं रावण. ये रावण नहीं जिसे आप आज मारने वाले है मैं तो दूसरे रावण की बात कर रहा हूं जिसके न जाने कितने रूप, रंग, आकार और छवियां है. आज फिर वहीं नाटक, फिर वहीं ड्रामा.

हमारे शहर में तो भाई भाभी ने भैया के लिए सीट खाली कर दी अरे सीट मतलब राम की सीट आज वे राम बनकर रावण को मारने वाले हैं, वाह भैया, धन्य है भाभी पर. एक बात और अपने पर होती राजनीति और अत्याचार को दशहरा के पहले ही रावण गुस्से से जल गया.

पिछले पंद्रह दिनों से शहर में 2 फीट से लेकर 70-80 फीट तक रावण के पुतले बनाने का काम ऐसे चल रहा था जैसे कि घर में शादी होने वाली है। पुलिस ग्राउंड में भैया और भाभी के झगड़े में फंसा सरकारी रावण, रेलवे क्षेत्र में बिना पहियों वाला रेल रावण, सरकंडा में ब्राह्मणों का रावण और न जाने कहां-कहां कितने-कितने रावण.

मुझे एक घटना याद आ रही है. मैं काफी छोटा था. उस समय हमारे गांव में दशहरा के मौके पर खूब धमा-चौकड़ी होती थी. एक बार दशहरा में रावण का पुतला दस दिनों से बनाया जा रहा था. काफी बड़ा पुतला 50 फीट का. लेकिन दशहरा की सुबह ही एक पागल ने उसे जला दिया. तब मुझे बहुत बुरा लगा. आज जब मैं इस बात को सोचता हूं तो उस पागल की हरकत सही लगती है मुझे तो ये भी लगता है कि वह पागल नहीं था. बल्कि पागल तो वो है जो राम का चोला पहनकर न जाने कितने रावण राम बनकर रावण के पुतले को जलाते हैं. रावण पूजनीय है, इसलिए नहीं कि वह ब्राहमण है बल्कि इसलिए कि जिससे काफी सारी चीजे सीखी जा सकती हैउसे जलाना ठीक नहीं. रावण सिखाता है कि दुनिया में हर बुराई के पीछे अगर अच्छाई की मंशा हो तो हर बुराईअंतत: अच्छाई का रूप ले लेती है.

रावण यह भी सिखाता है कि चाहे इंसान कितना भी बड़ा बन जाए लेकिन वह भगवान अर्थात विज्ञान की भाषा में सुप्रीम पावर से कभी उपर नहीं उठ सकता. अब अंत में एक बात जैसा कि मैंने आपको पहले ही बताया कि मैं बहुत परेशान हूं, अपने रावण से. पिछले साल उसने वादा किया था कि वह मुझे छोड़ देगा लेकिन इस साल तक वह मेरे साथ है और न जाने कितने समय तक रहेगा? उसकी नीयत कुछ ठीक नहीं है.

आज सुबह मैंने गुस्से में आकर उससे पूछा कि आज तो मेरा साथ छोड़ दो, मुस्कुराकर उसने कहा कि क्या तुमने मुझे मूर्ख समझ रखा है, शाम को तुम मुझे जलाओगे और सुबह मैं तुम्हें छोड़ दूं. मैंने कहा पिछले साल एक अखबार के लिए तुम्हारे पक्ष में आर्टिकल लिखा था तब तो तुमने कहा था कि छोड़ दोगे. इस पर उसने कहा कि इस जनम में तो मुश्किल है, कोशिश करके देख लो. मैं तो अपने रावण से बहुत परेशान हूं उम्मीद है कि आप लोग भी अपने-अपने रावण से परेशान होंगे. फिर भी इस परेशानी के बाद-------
विजयादशमी की शुभकामनाएं, रावण के पुतले को जलाने के लिए नहीं बल्कि इस उम्मीद के साथ की एक बुराई आप छोड़ देंगे.

5 टिप्‍पणियां:

  1. I must thank Sunil for his candid assessment of the situation in which present day Ravans are behind the blood of effigy of Ravana.

    It makes me laugh to see hundreds of RAVANA coming out with Chamchas to burn their own effigy.

    PRAVIN PATEL

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  2. आप सब को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीकात्मक त्योहार दशहरा की शुभकामनाएं.
    आज आवश्यकता है , आम इंसान को ज्ञान की, जिस से वो; झाड़-फूँक, जादू टोना ,तंत्र-मंत्र, और भूतप्रेत जैसे अन्धविश्वास से भी बाहर आ सके. तभी बुराई पे अच्छाई की विजय संभव है.

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  3. शानदार..बेहतरीन...लाजवाब। सुनील भाई कमाल का लिखा है... बधाई। विजयदशमी की बधाइयां।

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  4. दुनिया की दुनियादारी से किसको विराग है
    लोभी पतिंगों के लिए दोषी चिराग है
    बारूद के एक ढेर पर बैठी है ये दुनिया
    बारूद से ज्यादा हमारे दिल में आग है

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