रविवार, 26 सितंबर 2010

तोते का चरित्र हनन


सुनील शर्मा

किसी भी व्यक्ति के चरित्र को लेकर बात करना एक आम बात है और वैसे भी
यह निंदा रस का सबसे प्रमुख तत्व माना जाता है. इस बात पर मैं भी यकीन करता है. मनुष्य के चरित्र की चर्चाएं तो समझ में आती है लेकिन जब तोते के चरित्र को लेकर चर्चा हो तब यह विषय बिल्कुल भी
समझ में आने वाला नहीं है.
यह
कई
मायने में दिलचस्प भी हो जाता है.
मेरे मित्र और जाने-माने चित्रकार, फोटोग्राफर और कवि रमण किरण ने रविवार 26 सितंबर को काफी हाउस में ''तोते का चरित्र हनन'' विषय पर परिचर्चा आयोजित कर जैसे मुझे चौंका ही दिया.

स्वाभाविक रूप से उनका अभि
न्न मित्र और उनकी मासिक पत्रिका जंगल बुक का पूर्व कार्यकारी संपादक होने के नाते मैं परिचर्चा में उपस्थित था. पूर्व में भी वे ऐसी कई परिचर्चाओं का आयोजन कर चुके हैं, जिनके केंद्र में पशु-पक्षी रहे हैं.

परिचर्चा में उम्मीद के मुताबिक गिने-चुने कुल दस लोग उपस्थित थे. सच कहूं तो मुझे इतने लोगों के आने की भी उम्मीद नहीं थी. खैर परिचर्चा की शुरुआत औपचारिक रूप से रमण किरण जी ने नेचर क्लब के सदस्य अर्जुन भोजवानी जी का स्वागत कर किया और उनका इस कार्य में अरपा विकास कार्यक्रम के महामंत्री और पर्यावरण प्रेमी अनिल तिवारी ने दिया. पता चला कि श्री भोजवानी राजनीति के अलावा समय निकालकर ऐसे बहेलियों को भी सबक सिखाते रहे हैं, जो तोता-मैना और अन्य पक्षियों का अवैध व्यापार करते हैं. अब तक करीब वे हजारों पक्षियों को बहेलियों की चंगुल से आजाद कराकर उन्हें आसमान के हवाले कर चुके हैं, जो कि उनका अधिकार भी है.

इस परिचय के बाद परिचर्चा के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए और कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए रमण किरण जी ने अपनी टूटी-फूटी हिंदी में बताया कि 17 सितंबर को अखबारों में खबर आई कि कोलंबिया के बारानक्विला शहर में पुलिस ने एक तोते को इसलिए गिरफ्तार कर लिया क्योंकि उसने तस्करों और चोरों को भगाने में उनकी सहायता की. वहां के स्थानीय समाचार पत्र एल हेराल्ड
के मुताबि गंभीर शिकायत मिलने पर 300 पुलिस अधिकारियों ने एक योजना के तहत एक घर पर बुधवार को छापेमारी की थी. पुलिस को यह सूचना मिली थी कि घर में चोर और नशीले पदार्थों के तस्कर छिपे हुए हैं.

पुलिस अधिकारियों ने जब घर में दबिश दी तब उन्हें एक आवाज सुनाई दी, जिसमें कहा गया-भागो, भागो नहीं तो बिल्ली तुम्हें पकड़ लेगी. बाद में पुलिस अधिकारियों ने पाया कि ऐसा लोरेंजा नाम के एक तोते ने किया था. अपराधियों ने उसे इसी काम के बाकायदा प्रशिक्षित किया था. तोते द्वारा सतर्क किये जाने के बाद चार को छोडक़र शेष अपराधी भाग निकले. पुलिस ने तोते को गिरफ्ता
कर एक ऐसी संस्था के हवाले कर दिया जो पशु-पक्षियों के संरक्षण का काम देखती है. पुलिस ने चार अपराधियों के साथ 250 चाकू और एक हजार पैकेट नशीले पदार्थ बरामद किये. पुलिस का कहना है कि तस्करों ने लोरेंजा की तरह ही करीब 1700 तोतों को ट्रेंड किया है.

रमण किरण जी ने कहा कि इस खबर के बाद तोते की प्रजाति पर पूरे विश्व में संकट के बादल छा गये हैं. अब जहां पुलिस वाले तोतों को पकड़ रहे हैं, वहीं इस निरपराध पक्षी का उपयोग नशीले पदार्थों के तस्कर करने लगे हैं जो कि दुखद है. इससे तोते के पवित्र चरित्र का हनन हो रहा हैं. उन्होंने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में तोते का
जो स्थान है, वह कहीं नहीं है, क्योंकि यहां सुआ गीत से लेकर पौराणिक कथाओं में भी तोता एक प्रमुख पात्र की भूमिका निभाता आया है. उन्होंने उपस्थित वक्ताओं से आग्रह किया कि तोता के संरक्षण एवं संवद्र्धन के लिये वे अपने विचार प्रकट करें.

पर्यावरण प्रेमी और कन्या महाविद्यालय की प्राध्यापिका डा. कावेरी दाभडक़र ने कहा कि मनुष्य और पशु-पक्षियों का संबंध आदिकाल से ही रहा है. दुख की बात तो यह है कि मनुष्य शुरू से ही पशु-पक्षियों का उपयोग अपने निहित स्वार्थ के लिए करता आ रहा है. अब स्थिति विकट होती जा रही है. कोलंबिया की घटना की निंदा करते हुये उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पशु-पक्षियों के शिकार की घटनायें बढ़ रही है और सभी को मिलकर प्रयास करना होगा कि इस प जल्दी से जल्दी रोक लगाई जाये. लोक जीवन में तोता के महत्व को बताते हुए उन्होंने इसे ब्राह्मण बताया. उन्होंने कहा कि जाति से नहीं बल्कि सच्चाई का प्रतीक तोता होता हैं. यदि तोता का संरक्षण नहीं किया गया तो यहां भी कोलंबिया की तरह घटना होगी.

तोता को सीधा और सरल पक्षी बताते हुये शहर के जाने-माने साहित्यकार और पर्यावरणप्रेमी डा. विनय कुमार पाठक ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुआ गीत की गायन परंपरा वर्षों से है. यह सिद्ध करता है कि इस पक्षी से हमारा पुराना और गहरा संबंध है.

यह संदेशवाहक की भूमिका निभाता रहा है और यह आदमी की हुबहू नकल करने में माहिर हैं
. तोते को हम जैसा सिखायेंगे वह वैसा ही सिखेगा. यदि कोई इस पक्षी का इस्तेमाल गलत कार्य में करता है तो इसके लिये वह दोषी नहीं है. तोता निर्दोष है. कोलंबिया पुलिस को अपनी इस हरकत के लिये शर्मिंदा होना चाहिये. कोलंबिया की घटना से सबक लेने की जरूरत है.

पर्यावरण प्रेमी अनिल तिवारी ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुये कहा कि जब वे पहली कक्षा में थे तो तोता पर एक कविता पाठ 16 में थी. वह कविता आज भी उन्हें याद है. कविता पाठ करने के बाद उन्होंने कहा कि तोता कई पौराणिक कथाओं का पात्र है और मनुष्य का एक तरह से साथी भी है. अलिफ लैला की कहानियों में भी तोता है और हमारे देश की पुरातन कथाओं में भी. तोता के साथ ही मैना को भी महत्वपूर्ण पक्षी बताते हुये उन्होंने मांग की कि इ पक्षियों के शिकार और इनको पिंजरे में बंद करने वालों, इन्हें बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिये. इन्हें जेल भेजना चाहिये और उनसे पूछना चाहिये कि हवालात के भीतर कैद होकर वे कैसा महसूस कर रहे हैं.

अर्जुन भोजवानी ने इस दौरान अपने कई अनुभव बताये. उन्होंने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से प्रयास कर रहे हैं कि बहेलियों
द्वारा मासूम पक्षियों का शिकार न किया जाये, इनकी बिक्री न की जाये और लोग इन्हे पिंजरों में कैद करके न रखे. उन्होंने हाल ही की गई अपनी 20 दिवसीय यात्रा का अनुभव बताते हुये कहा कि वे हिमाचल प्रदेश और पंजाब में देखकर आये है कि वहां कोई पक्षियों को पिंजरों में कैद करके नहीं रखता. पक्षी घरों में आते हैं और दाना चुगकर फिर से आसमान की सैर में निकल जाते है. उन्होंने शहर और पूरे प्रदेश में भी इस तरह का वातावरण निर्मित करने के लिये प्रयास करने पर बल दिया.

अपोलो में पदस्थ मित्र सीएम मिश्रा ने अपने शैक्षणिक जीवन की याद करते हुए कहा कि विशिष्ट हिंदी विषय के साथ अध्ययन करते हुए उन्होंने तोते के बारे में एक बात पढ़ी थी. तब से ही तोता उनके लिए काफी महत्व रखता है. उन्होंने तोतों का इस्तेमाल हथियार और नशीली दवाओं के लिए होने को दुखद बताया. साथ ही यह आश्वासन दिया कि जब भी तोतों के संरक्षण और संवद्र्धन के लिए उन्हें बुलाया जायेगा वे उपस्थित हो जायेंगे और हर संभव मदद करेंगे.

इस अवसर पर मौजू
द अधिवक्ता मित्र राजेश दुबे ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे मित्रों, रिश्तेदारों को जो तोता व अन्य पक्षियों को पिंजरों में कैद करके रखते हैं, को हतोत्साहित करना चाहिये और उनके इस कार्य की सार्वजनिक रूप से निंदा करनी चाहिये, ताकि वे लज्जित होकर ऐसा न करें. ऐसा करके हम मासूम पक्षियों की बड़ी मदद कर सकते हैं, क्योंकि जब लोग खरीदेंगे ही नहीं तो उन्हें बेचने के लिए बहेलिये उनको पकड़ेंगे क्यों.

अधिवक्ता साथी मनोज
अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से पता किया है कि कोलंबिया में तोता बहुत ही आम पक्षी माना जाता है. वहां की कथाओं व आम जीवन में तोता को कोई स्थान प्राप्त नहीं है. वहां हमे मेल के जरिये यह संदेश भेजना चाहिये कि तोता को पुलिस द्वारा इस तरह गिरफ्तार किया जाना ठीक नहीं है. उन्होंने वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की कुछ उन धाराओं का भी उल्लेख किया जिनका संबंध पक्षियों के शिकार व पकडऩे से हैं. इस अवसर पर कोरबा से आये प्राध्यापक उमेश प्रसाद साहू, अधिवक्ता रमेश मिश्रा भी उपस्थित थे.

इस परिचर्चा के बाद देर तक हम आपस में चर्चा करते रहे. परिचर्चा का विषय काफी छोटा लग रहा था लेकिन जब परिचर्चा शुरू हुई तब जैसे इस विषय ने एक बड़ा आकार ले लिया. इस परिचर्चा के दौरान ही तोते के विषय में कई ऐसी बातें जानने मिली, जो शायद आप भी नहीं जानते होंगे, जैसे यह एक पत्नीव्रती पक्षी है. तोता झुंड में रहता है. नर और मादा एक जैसे होते हैं. हरा तोता सबसे अधिक प्रसिद्ध होता है जो
अफ्रीका से लेकर लालसागर होता हुआ भारत, बर्मा, आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड तक पाया जाता है चूंकि ये सारे इलाके गर्म कहे जाते हैं. मादा (तोता) एक से बारह तक सफेद अंडे देती है और हमारे देश में तोते हर प्रांत व वनाच्छादित क्षेत्रों में पाये जाते हैं.

मैं चाहता हूं कि आप यह संकल्प
लें कि आज के बाद आप तोते को पालने वालों, तोते को प्रशिक्षण देने वालों, तोतों के प्रदर्शन हेतु इसके चिडिय़ाघरों में रखने का विरोध करेंगे. साथ ही बहेलियों को तोतों को बेचने के लिए ले जाते हुए देखेंगे तो वन विभाग के अधिकारियों को या अर्जुन भोजवानी या रमण किरण(मो.-9300327324)को सूचित करेंगे.

तोते
को गुनहगार पंछी प्रमाणित होने से बचाने के लिये सरकार, वन विभाग, पक्षी प्रेमी, प्रकृति पे्रमियों को सावधान हो जाना चाहिये ताकि इस प्रजाति को बचाया जा सकें.


यहां एक बच्चे की कविता पेश करते हुऐ मुझे खुशी हो रही है, नि:संदेह कविता का शीर्षक तोता ही है-

डाल पर बैठा तोता , हमने देखा वह पका आम खाता.....
मै
नीचे बैठा वह ऊपर बैठा,
उस आम के लिए मै एठा......

बैठा सोचू कि यह आम मुझे ही मिले, इसका रस मेरे पेट में जाकर टहले....
बार बार तोता मेरी ओर देखता , मुझे देखकर ठाँव ठाँव कर गता......
तब
तक आम गिरा वह नीचे,
उसे उठाने दौड़ा मैं उसके पीछे......
जैसे
ही उसको पाया धुल कर मैं ने खाया ,
उसको खाने में बड़ा मजा आया.....
तब तक तोता रोया इतनी जोर से, पेड़ के सारे आम गिरे उसके इस शोर से .....

सारे
आमो को हमने उठाया,
फिर जाकर घर में सबके साथ में खाया......

--आशीष कुमार कक्षा ७













1 टिप्पणी:

  1. मुझे यह बताने में शर्म आ रही है की मेरेघर में दो तोते को मेरे पिता ने कैद कर रखा है अब विडम्बना यह है मैंने उसे उदा दिया तो पिताजी को दुःख होगा मई उनकी सोंच का विरोध करके थक चूका हू बस आखरी बार उनको यह आर्टिकल पढ़ा दू नहीं माने तो मोका देख कर उड़ा दूँगा |........................................................

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