शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

केशव भैया और करवा चौथ


श्री केशव शुक्ला

आज करवा चौथ है...आज के दिन से जुड़ी एक खास बात मुझे याद आ रही है...जब मैं पत्रकारिता में नया—नया आया था, तो हरिभूमि बिलासपुर में धर्म—कला—संस्कृति वरिष्ठ पत्रकार केशव शुक्ला जी कवर करते थे. 

उनके बारे में एक कथा कुछ यो प्रचलित थी कि एक बार शुक्ला जी करवा चौथ के दिन एक पंजाबी महिला से व्रत के संबंध में पूछने गए. कुछ जानकारी देने के बाद पूजा करते हुए तस्वीर लेने के लिए उन्होंने उन्हें पूजा के वक्त बुलाया. शुक्ला जी बड़े जुझारू पत्रकार थे वे वक्त से पहले ही उस महिला के घर फोटोग्राफर को लेकर चले गए.उन्हें देखकर महिला ने कहा...भैया अभी न तो मेरे पति आये है और न चांद ही निकला है और आप आ गए...अब मैं पूजा किसकी करूं...

इस प्रसंग को लेकर साथी जमकर चटखारे लेते थे...शायद ही ऐसा कोई करवाचौथ हो जब शुक्ला जी को याद न किया जाता हो...फिर वे ड्यूटी में रहे या न रहे...मित्रों इस बात को शेयर करते हुए मुझे खुशी भी हो रही है और दुख भी क्योंकि अब शुक्ला जी पत्रकारिता की मुख्यधारा से अलग हो चुके है. उनके चरणों में मेरा सादर प्रणाम और ईश्वर से प्रार्थना की उन्हें लंबी आयु प्रदान करें.

धर्म—कला—संस्कृति बीट को पत्रकारिता में उपेक्षित समझा जाता है लेकिन ऐसे क्षेत्र में भी उन्होंने खूब नाम कमाया. इस क्षेत्र में उनके टक्कर का कोई पत्रकार नहीं है और कार्पोरेट मीडिया के इस युग में नहीं लगता कि इन बीट पर कोई पत्रकार काम भी करेगा.हालांकि अभी भाई नीरज दीवान (पत्रकार,नई दुनिया) ने शुक्ला जी की इस विरासत को संभालने का पूरा प्रयास किया है...पर शुक्ला जी तो शुक्ला जी है.यदि शुक्ला जी मेरे इस लिखे को  पढ़ेंगे तो उम्मीद करता हूं कि बुरा नहीं मानेंगे तो... आखिर उनके स्नेह पर मेरा भी तो अधिकार है.

केशव भैया की पत्रकारिता से जुड़ी कुछ और दिलचस्प बातें आगे भी जारी रहेगी.उनके पान खाने,उनकी आदतों और उनके द्वारा लिखी गई किताबों के बारे...
 * करवा चौथ की सभी को शुभकामनाएं.
-सुनील शर्मा

1 टिप्पणी:

  1. इस पोस्ट का एकमात्र उद्देश्य आज की पीढ़ी को केशव भैया की पत्रकारिता के जुझारूपन से अवगत कराना है...उद्देश्य कतई उनके मजाक उड़ाने का नहीं है...यदि फिर भी किसी को अन्यथा लगे...तो मैं क्षमाप्रार्थी हूं.

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