रविवार, 28 दिसंबर 2025

एसआईआर  ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद लोगों को नाम कटने की आशंका, नाम कैसे खोजे, कौन-कौन से तरीके हैं, ये बता रहे ताकि जिनके कट गए वे जुड़वा सकें‎


इपिक नंबर, नाम या मोबाइल ओटीपी से देखें वोटर लिस्ट में नाम, यदि न हो तो फॉर्म छह भरें‎


बिलासपुर‎

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम होने या न होने‎की जानकारी जांचने के लिए चुनाव आयोग‎ने तीन आसान तरीके दिए हैं। लोग इपिक‎नंबर, अपने व्यक्तिगत विवरण जैसे कि‎नाम, पिता का नाम, राज्य आदि के माध्यम‎से अपना नाम खोज सकते हैं। साथ ही वे‎मोबाइल नंबर के माध्यम से नाम की‎तलाश कर सकते हैं। यदि नाम नहीं है तो‎उन्हें जुड़वाने के लिए फॉर्म 6 भरकर जमा‎करना होगा। एसआईआर का पहला चरण‎(4 नवंबर से लेकर 18 दिसंबर) पूरा हो‎चुका है। चुनाव आयोग ने 23 दिसंबर को‎ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की।‎ उप जिला‎निर्वाचन अधिकारी शिवकुमार बनर्जी ने‎बताया कि लोगों को इसके लिए परेशान‎होने की जरूरत नहीं है। वे बहुत ही‎आसानी से अपना नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट‎में खोज सकते हैं। इसके​ लिए उन्हें गूगल‎पर वोटर्स डॉट ईसीआई डॉट जीओवी‎डॉट इन टाइप करना होगा। इसमें इपिक‎नंबर, अपने व्यक्तिगत विवरण जैसे कि‎नाम, पिता का नाम, राज्य आदि के माध्यम‎से अपना नाम खोज सकते हैं। साथ ही वे‎मोबाइल नंबर टाइप कर ओटीपी के‎माध्यम से भी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपने‎नाम की तलाश कर सकते हैं।‎

बड़ी संख्या में कटौती से मतदाताओं में हड़बड़ी‎‎

मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने के बाद आम लोगों में चिंता‎बढ़ गई है। कई मतदाता आशंकित हैं कि कहीं उनका नाम भी तो लिस्ट से‎नहीं कट गया। इसी डर के कारण लोग ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम जांचने‎के लिए तेजी से ऑनलाइन और कार्यालयों का रुख कर रहे हैं।‎

ऐसे ऑनलाइन चेक करें अपना नाम‎

 सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाएं।‎

 होमपेज पर दाईं ओर ऊपर दिए गए ‘Search your name in‎voter List विकल्प पर क्लिक करें।‎

 क्लिक करने पर सर्च के तीन ऑप्शन आएंगे।‎

 पहला वोटर आईडी कार्ड नंबर दर्ज कर सर्च कर सकते हैं।‎

 दूसरा अपना नाम, पिता का नाम, राज्य आदि के माध्यम से नाम‎खोज सकते हैं।‎

 तीसरा मोबाइल नंबर के माध्यम से नाम खेाज सकते हैं। नंबर दर्ज‎करने पर ओटीपी आएगा और उसे दर्ज करने पर नाम सर्च हो जाएगा।‎

 तीनों ऑप्शन में बताया गया कैप्चा टाइप करना होगा।‎‎


ड्राफ्ट लिस्ट में जिले के 3.63 लाख मतदाता बाहर‎

जिले में कुल 16 लाख 75 हजार 770 मतदाताओं में से केवल 13 लाख‎12 हजार 223 नाम ही ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में शामिल हैं। वहीं 3 लाख‎63 हजार 547 मतदाताओं के नाम सूची से कट गए हैं। इनमें मृत, स्थायी‎रूप से शिफ्ट हुए, लंबे समय से अनुपस्थित और दो बार फॉर्म भरने वाले‎मतदाता शामिल हैं।‎

 

घोषणा पत्र से जुड़ेंगे नाम‎

‎‎‎‎यदि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं है, तो‎22 जनवरी तक फॉर्म 6 और घोषणा पत्र‎जमा कर नाम जोड़ा जा सकता है।‎घोषणा पत्र में यह बताना होगा कि 2003‎की मतदाता सूची में नाम था या नहीं। यदि‎नाम नहीं था, तो माता-पिता का इपिक‎नंबर देना होगा। यदि माता-पिता का नाम‎भी सूची में नहीं था, तो 11 में से किसी‎एक दस्तावेज के आधार पर नाम जोड़ा‎जा सकता है। पहले केवल जन्म और‎निवास प्रमाण पत्र के आधार पर नाम‎जोड़ा जाता था।‎

रविवार, 28 जुलाई 2013

दीपक करते हैं गूगल में बदलाव

सुनील शर्मा बिलासपुर

गूगल, गूगल क्रोम, जी-मेल जैसे ४० से अधिक साइट के यूजर्स के सुझावों और शिकायतों को समझकर उनके हिसाब से बदलाव लाने की जिम्मेदारी शहर के युवा दीपक तिवारी संभालते हैं। वे दुनिया के सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन 'गूगल' में बिजनेस एनालिटिक्स के सीनियर मैनेजर हैं। आईआईटी खडग़पुर की पढ़ाई के बाद अमेरिका पहुंचे तो कई पड़ावों को पार कर वे इस मुकाम पर पहुंचे। उनकी पत्नी सुप्रिया बोस्टन यूनिवर्सिटी में कैंसर पर रिसर्च कर रहीं हैं। मस्तूरी के लोहर्सी में उनका पुश्तैनी मकान और जमीन-जायदाद है। दीपक का बचपन बिलासपुर में ही बीता।

 दीपक दुनियाभर के उपभोक्ताओं की रुचि व संतुष्टि का ख्याल रखने की दिशा में काम करते हैं। गूगल के गूगल क्रोम, जी-मेल जैसे 40 से अधिक साइट्स हैं। इन्हें लेकर यूजर्स के सुझाव व शिकायतें आती हैं। इनके आधार पर ही वे डेटा कलेक्ट कर प्रोडक्ट में बदलाव लाने या नया प्रोडक्ट बनाते हैं। वे विभिन्न डिवाइस खरीदने वालों की रुचि का ख्याल भी रखते हैं। उन्हें ये सुझाव हैल्प सेंटर व हैल्प फोरम के जरिए दुनियाभर से मिलते हैं। उनके पास एक टीम है जो कई भाषाओं के यूजर्स को डील करती है। वे अपने काम में एडवांस मैथमेटिक्स यूज करते हैं।
गूगल में बड़े पैकेज पर काम कर रहे दीपक भविष्य में वतन लौटना चाहते हैं। वे उन हजारों युवाओं को गाइड भी करना चाहते हैं, जो टैलेंटेड होने के बाद भी सही मार्गदर्शन व जानकारी न मिलने से भीड़ में कहीं खोते जाते हैं।
इसी ध्येय से वे यहां कुछ दिनों तक शहर के एक कोचिंग सेंटर में युवाओं को पढ़ा चुके हैं। दीपक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर व हाईटेक्नालॉजी के पक्षधर हैं, लेकिन जीवन में सरलता बनाए रखने की बात भी कहते हैं।

शिकागो से सपनों को लगा पंख

दीपक के टैलेंट को पहली बार रायपुर के सलेम इंग्लिश मीडियम स्कूल में पहचाना गया। इसके बाद दीपक ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2001 में आईआईटी खडग़पुर से पासआउट हुए और अमेरिका पहुंच गए। वहां जॉब की शुरुआत आसान नहीं थी। शिकागो की केटरपिलर कंपनी में सीनियर मैनेजर के रूप में ब्रेक मिला तो सपनों को पंख लग गए। फिर डेलोइट में सीनियर कंसल्टेंट व एसेंटर में इंगेजमेंट मैनेजर के पद पर काम किया। जून 2011 में दीपक को गूगल का ऑफर मिला। गूगल में बड़े पैकेज पर काम कर रहे दीपक भविष्य में वतन लौटकर उन हजारों युवाओं को गाइड भी करना चाहते हैं, जो टैलेंटेड होने के बाद भी सही मार्गदर्शन न मिलने से भीड़ में कहीं खोते जाते हैं।

पत्नी सुप्रिया पर नाज

दीपक ने रायपुर के प्रमोद व माधुरी शर्मा की बेटी सुप्रिया से शादी की है। सुप्रिया बोस्टन यूनिवर्सिटी में कैंसर पर रिसर्च कर रही हैं। रविशंकर यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने के बाद वे स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में रिसर्च कर चुकी हैं। शांत व सरल सुप्रिया पर दीपक को नाज है।

आती है वतन की याद

बकौल दीपक, 'दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट सर्च इंजन 'गूगल' में जिम्मेदार पद पर साढ़े 10 घंटे लगातार काम करने के बाद जब भी रिलेक्स होता हूं, अपने घर और शहर की याद सताने लगती है। सोचता हूं, उड़कर उन गलियों में पहुंच जाऊं जहां बचपन बीता है।' अमेरिका के माउंटेन व्यू में भव्य कार्पोरेट ऑफिस हो या फिर सेन फ्रांसिस्को की पोक स्ट्रीट का अपार्टमेंट... वहां दीपक को अपने बचपन की नादानियां और दोस्त अक्सर याद आते हैं। शहर में भी बार-बार आना भी आसान नहीं है... लेकिन जब भी मौका मिलता है, वे घरवालों और रिश्तेदारों से मिलने के लिए अपने वतन पहुंच जाते हैं। एक रिश्तेदार की शादी ने यह मौका दिया तो वे खुद को नहीं रोक सके। एनआरआई दीपक गूगल के कंज्यूमर ऑपरेशन ग्रुप से जुड़े हैं और बिजनेस एनालिटिक्स के सीनियर मैनेजर हैं। यह डिपार्टमेंट गूगल के प्राफिट, लॉस के अलावा गूगल यूजर्स की रुचि, संतुष्टि, शिकायतों पर नजर रखता है। दीपक के पिता ईश्वरलाल तिवारी व मां विमला तिवारी शहर में मुख्य डाकघर के पास विमला सदन में रहते हैं।

दीपक कहते हैं...
१. छत्तीसगढ़ ही नहीं, भारत में एजुकेशन फेसिलिटी बढ़ रही है, लेकिन काफी कुछ करना बाकी है।
२. प्रगतिशील देश की अपनी चुनौतियां होती हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहें।

गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

आठवीं पास मनीराम ने छेड़ी फेसबुक पर जंग


सुनील शर्मा.बिलासपुर

शायद यह पहला मामला है जब किसी ग्रामीण
 महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना
(मनरेगा) के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने और इसका विरोध करने के उद्देश्य से सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर अपना एकाउंट बनाया है।

खुद मुंगेली जिले के लोरमी ब्लाक के ग्राम बोईरपारा के 34 वर्षीय मनीराम कैवर्त ने नवंबर 2012 के पहले कभी इसके बारे में नहीं सोचा था। लेकिन उसने अगली पीढ़ी के भविष्य के लिए मनरेगा के खिलाफ जंग छेडऩे का मन बनाया। तभी आर्थिक कारणों से उसे गांव छोडऩा पड़ा।

मनरेगा में मजदूरी नहीं मिली तो वह काम की तलाश में भटकता हुआ गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी कोनी पहुंचा जहां उसके रिश्तेदार की मदद से रोजी-मजदूरी का काम मिला। कुछ दिनों बाद उसने अपने मित्रों से संपर्क कर अपनी इच्छा बताई। मित्रों ने उन्हें फेसबुक और इसके व्यापक परिणाम से अवगत कराया। मनीराम ने अपने एक दोस्त की मदद से 19 नवंबर 2012 को फेसबुक पर अपना एकाउंट बनाया लेकिन उसने अपना इमेल आइडी मनी बोईरपारा ही रखा ताकि गांव का नाम उससे किसी भी तरह अलग न हो पाए। गांव का नाम थोड़ा अलग होने के बाद भी उसने इसकी चिंता नहीं की।

 इसके बाद उसने एक-एक कर कई खुलासे किए। उसने दस्तावेज के साथ गांव में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़े निर्माण कार्यों की तस्वीर भी शेयर की। फेसबुक पर मनी के विधायक सौरभ सिंह,पिछड़ा वर्ग अध्यक्ष सोमनाथ यादव,समाजवादी आनंद मिश्रा के साथ ही राजनीति,शिक्षा,पत्रकारिता और युवा जगत के 122 मित्र है। उसके शेयर पर अब कमेंट भी आने लगा है। मनीराम को उम्मीद है कि उसका आदर्श गांव बनाने का सपना एक दिन जरूर पूरा होगा और इसमें फेसबुक उसकी मदद करेगा।

ये किया शेयर

0 19 नवंबर 2012 को मनीराम ने सांसद निधि से स्वीकृत पांच लाख के सीसी रोड के प्रगति प्रतिवेदन की छायाप्रति की तस्वीर शेयर कर बताया कि काम शुरू ही नहीं हुआ है।
0 उसने दिसंबर में आरटीआई द्वारा सूचना मांगने पर धमकी मिलने की बात शेयर की।
0 सजग ने उसे हौसलाभरा पत्र भेजा जिसे भी उसने शेयर किया।
0 22 जनवरी को गांव की पांच तस्वीरे शेयर की-1-गोशाला बन चुके पंचायत भवन,2- खेल मैदान में भ्रष्टाचार की जानकारी देता युवक ,3-गुणवत्ताहीन निर्माणाधीन प्रधानपाठक कक्ष,4-सरपंच के देवर द्वारा श्मशान भूमि पर कब्जा कर बना मकान,5-पंचायत के एक भवन पर कब्जा।

सजग ने दिया हौसला

आरटीआई के तहत सूचना मांगने पर धमकी मिलने से परेशान मनीराम ने फेसबुक पर इसे सांझा किया तो तो सोशल एंड ज्यूडिशयल एक्शन ग्रुप(सजग) ने मनीराम को एक पत्र लिखा। सजग के संयोजक विनोद व्यास ने सूचना के अधिकार को लेकर मनीराम द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए  किसी भी तरह के समाज विरोधी लोगों से डरे बिना समाज को बेहतर बनाने की दिशा में काम करते रहने का हौसला दिया। यह भी कहा कि सजग के साथी हमेशा उनके साथ है।

ऐसे मिली प्रेरणा

13 अक्टूबर 2012 को केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के निर्देश पर सेंटर फॉर इकानामिक एंड सोशल स्टडीज की सेंट्रल टीम गांव का सर्वे करने पहुंची तो उन्होंने युवा मनीराम से गांव में मनरेगा के कार्यों को लेकर देर तक चर्चा की। मनीराम ने उन्हें भ्रष्टाचार की जानकारी दी तो उन्होंने इसके लिए उन्हें आवाज उठाने कहा। इसी दिन से युवा ग्रामीण ने मनरेगा में भ्रष्टाचार करने वालों को सबक सिखाने का मन बनाया।

मित्रों मैं गांव का एक गरीब किसान हूं और महज आठवीं तक ही पढ़ सका हूं । मुझे अपने ग्रामीण होने पर गर्व है लेकिन दुख इस बात का है कि वहां भ्रष्टाचार ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। मनरेगा में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लडऩे के लिए अपने मित्र के सुझाव और सहयोग से मैंने फेसबुक ज्वाइन किया है...उम्मीद है आप सभी से मुझे मदद मिलेगी। 
                                                                                                     मनीराम कैवर्त,फेसबुक पर